जूस की दुकान से महादेव सट्टा के साम्राज्य तक… 200 करोड़ की शादी, दुबई की दौलत और अब भारत में सौरभ चंद्राकर!

ओमान से प्रत्यर्पण के बाद CBI की हिरासत में पहुंचा महादेव ऐप का प्रमोटर; रायपुर की अदालत में होगी पेशी, हजारों करोड़ के कथित नेटवर्क की जांच में खुल सकते हैं कई राज
CG NEWS 24 | 1 NOVEMBER 2026
रायपुर। एक दौर था जब छत्तीसगढ़ के दुर्ग-भिलाई में सौरभ चंद्राकर की पहचान जूस का कारोबार करने वाले युवक के रूप में थी। फिर वक्त बदला, कारोबार का तरीका बदला और देखते ही देखते उसका नाम देश के सबसे चर्चित ऑनलाइन सट्टेबाजी मामलों में शामिल हो गया। दुबई की आलीशान जिंदगी, महंगी गाड़ियां, विदेशी ठिकाने, निजी विमानों से मेहमानों की आवाजाही और करीब 200 करोड़ रुपये की कथित शादी… सौरभ की जिंदगी की ये तस्वीरें सामने आईं तो सवाल सिर्फ उसकी दौलत पर नहीं, बल्कि उस नेटवर्क पर उठने लगे जिसने इस कथित साम्राज्य को खड़ा किया था।
अब इस कहानी में सबसे बड़ा मोड़ आ गया है। महादेव ऑनलाइन बुक सट्टा सिंडिकेट का प्रमोटर और प्रमुख आरोपी सौरभ चंद्राकर ओमान से प्रत्यर्पित होकर भारत पहुंच चुका है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की विशेष टीम उसे मस्कट से लेकर आई है। अब उसे रायपुर की विशेष सीबीआई अदालत में पेश किया जाना है।
यह महज एक आरोपी की विदेश से वापसी नहीं है। यह उस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की जांच का नया चरण है, जिसके तार ऑनलाइन सट्टेबाजी, म्यूल बैंक खातों, हवाला लेनदेन और कथित सरकारी संरक्षण तक पहुंचने के आरोप हैं।
01 | शुरुआत: दुर्ग की जूस दुकान से चर्चा में आया नाम
सौरभ चंद्राकर की शुरुआती जिंदगी के बारे में मीडिया रिपोर्टों में बताया गया है कि वह दुर्ग-भिलाई इलाके में जूस की दुकान चलाता था। उसकी दुकान का नाम ‘जूस फैक्ट्री’ बताया गया है। सामान्य कारोबारी पृष्ठभूमि से आने वाले सौरभ का नाम बाद में रवि उप्पल के साथ जुड़ा।
रिपोर्टों के मुताबिक, दोनों ने पहले सट्टेबाजी के स्थानीय कारोबार से संपर्क बनाया और फिर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की दिशा में आगे बढ़े। वर्ष 2018 के आसपास महादेव ऑनलाइन बुक की शुरुआत से जुड़ी जानकारियां सामने आईं। बाद में यह नेटवर्क देश के अलग-अलग हिस्सों में पैनल और फ्रेंचाइजी के जरिए फैलता गया।
यहीं से कहानी ने ऐसा मोड़ लिया जिसने एक स्थानीय कारोबारी को अंतरराष्ट्रीय जांच एजेंसियों के रडार पर ला दिया।
02 | दुबई कनेक्शन: विदेश में बैठकर कैसे फैला नेटवर्क?
जांच एजेंसियों के मुताबिक, सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल ने विदेश में रहते हुए महादेव ऑनलाइन बुक के कारोबार का विस्तार किया। दोनों के दुबई जाने और वहां से नेटवर्क संचालित करने की बात विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में सामने आई है।
इस प्लेटफॉर्म का मॉडल केवल एक मोबाइल ऐप तक सीमित नहीं था। इसके पीछे पैनल, एजेंट और फ्रेंचाइजी की एक व्यवस्था बताई गई। अलग-अलग शहरों में स्थानीय संचालकों को पैनल दिए जाते थे। ये पैनल आगे उपयोगकर्ताओं को जोड़ते और उनके जरिए सट्टे का कारोबार संचालित करते थे।
क्रिकेट, फुटबॉल, टेनिस, बैडमिंटन और कार्ड गेम जैसे खेलों पर ऑनलाइन दांव लगाने की सुविधा दी जाती थी। इस व्यवस्था में उपयोगकर्ताओं से रकम जुटाने और उसे ऊपर तक पहुंचाने के लिए कई स्तर बनाए गए थे।
सीबीआई का आरोप है कि इस नेटवर्क का संचालन भारत के बाहर से किया जा रहा था, जबकि इसका उपयोगकर्ता आधार देश के विभिन्न हिस्सों में फैला था।
03 | 200 करोड़ की शादी: जब दुनिया ने पहली बार देखा सौरभ का शाही अंदाज
फरवरी 2023 में संयुक्त अरब अमीरात के रास अल खैमाह में हुई सौरभ चंद्राकर की शादी इस पूरे मामले का सबसे चर्चित घटनाक्रम बन गई। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपनी जांच में दावा किया था कि इस शादी पर लगभग 200 करोड़ रुपये नकद खर्च किए गए।
ईडी के अनुसार, परिवार के सदस्यों को नागपुर से यूएई ले जाने के लिए निजी विमान किराये पर लिए गए थे। शादी में बॉलीवुड के कई कलाकारों को आमंत्रित किया गया था। कार्यक्रम के लिए मुंबई से इवेंट मैनेजर, डांसर और डेकोरेशन टीम बुलाई गई थी।
ईडी ने यह भी आरोप लगाया था कि शादी के आयोजन से जुड़े भुगतान हवाला के जरिए किए गए। एजेंसी के मुताबिक, एक इवेंट मैनेजमेंट कंपनी तक कथित तौर पर 112 करोड़ रुपये हवाला के माध्यम से पहुंचाए गए थे। होटल बुकिंग पर लगभग 42 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का दावा भी जांच में सामने आया था।
यह शादी सिर्फ एक निजी आयोजन नहीं रह गई। इसकी भव्यता ने महादेव ऐप के प्रमोटरों की कथित कमाई और विदेशों में उनके आर्थिक नेटवर्क को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
सवाल यह था कि आखिर एक ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क से इतनी बड़ी रकम कहां से आ रही थी और उसका इस्तेमाल किन कामों में किया जा रहा था?
04 | महादेव ऐप का मॉडल: पैनल, एजेंट और करोड़ों का लेनदेन
महादेव ऑनलाइन बुक का कथित कारोबार एक साधारण मोबाइल एप्लिकेशन की तरह नहीं चल रहा था। जांच एजेंसियों के अनुसार, इसके पीछे फ्रेंचाइजी और पैनल आधारित नेटवर्क काम करता था।
इस व्यवस्था को मोटे तौर पर ऐसे समझा जा सकता है:
- मुख्य प्रमोटर: नेटवर्क के संचालन और विस्तार से जुड़े प्रमुख लोग।
- पैनल संचालक: अलग-अलग क्षेत्रों में सट्टेबाजी के प्लेटफॉर्म चलाने वाले एजेंट।
- स्थानीय एजेंट: उपयोगकर्ताओं को जोड़ने और रकम के लेनदेन में भूमिका निभाने वाले लोग।
- उपयोगकर्ता: क्रिकेट, फुटबॉल और अन्य खेलों पर दांव लगाने वाले लोग।
- वित्तीय नेटवर्क: सट्टेबाजी से प्राप्त रकम को अलग-अलग खातों और माध्यमों से आगे पहुंचाने की व्यवस्था।
सीबीआई की जांच में यह आरोप सामने आया कि नेटवर्क का संचालन फ्रेंचाइजी मॉडल के जरिए किया जाता था। अलग-अलग पैनल और शाखाएं उपयोगकर्ताओं को जोड़ती थीं तथा सट्टे की रकम एकत्र करती थीं।
इस व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण पहलू यह था कि कारोबार का नियंत्रण और पैसों का प्रवाह कई स्तरों में बंटा हुआ था। इससे जांच एजेंसियों के सामने केवल ऐप के संचालकों तक पहुंचने के बजाय पूरे वित्तीय नेटवर्क का पता लगाने की चुनौती खड़ी हुई।
05 | हवाला और म्यूल बैंक खाते: पैसे का रास्ता कहां जाता था?
महादेव सट्टा मामले में सबसे गंभीर आरोपों में से एक अवैध कमाई को छिपाने और विदेशों में भेजने का है।
सीबीआई के अनुसार, सट्टेबाजी से प्राप्त रकम को बड़ी संख्या में म्यूल बैंक खातों के जरिए ट्रांसफर किया जाता था। म्यूल खाते ऐसे बैंक खाते होते हैं जिनका इस्तेमाल वास्तविक लेनदेन के पीछे छिपे लोगों या धन के स्रोत को छिपाने के लिए किया जा सकता है।
जांच एजेंसी का आरोप है कि रकम को कई अलग-अलग लेनदेन के जरिए घुमाया जाता था। इसके बाद हवाला नेटवर्क के माध्यम से विदेश भेजा जाता था।
इस प्रक्रिया को मनी लॉन्ड्रिंग की जांच में अहम माना जाता है, क्योंकि इसमें अवैध कमाई को कई स्तरों पर ट्रांसफर करके उसके वास्तविक स्रोत को छिपाने की कोशिश की जाती है।
सीबीआई ने यह भी आरोप लगाया है कि इस नेटवर्क को बिना बाधा चलाने के लिए कुछ सरकारी अधिकारियों को कथित तौर पर संरक्षण राशि दी जाती थी। यही वजह है कि मामला केवल ऑनलाइन सट्टेबाजी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच का भी बड़ा विषय बन गया।
06 | दुबई की संपत्तियां: 1700 करोड़ रुपये की कुर्की
सौरभ चंद्राकर और महादेव नेटवर्क से जुड़े वित्तीय लेनदेन की जांच के दौरान ईडी ने भारत के साथ विदेशों में मौजूद संपत्तियों पर भी कार्रवाई की।
मार्च 2026 में ईडी ने इस मामले में करीब 1700 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क की थीं। इनमें दुबई के प्रीमियम इलाकों में स्थित लग्जरी विला और हाई-एंड अपार्टमेंट शामिल बताए गए। बुर्ज खलीफा स्थित संपत्तियों का भी उल्लेख जांच से जुड़ी रिपोर्टों में हुआ।
एजेंसी का आरोप है कि इन संपत्तियों का संबंध महादेव ऑनलाइन बुक और उससे जुड़े कथित अपराध से अर्जित रकम से है। संपत्तियां सीधे आरोपी के नाम पर होने के बजाय संबंधित कंपनियों या सहयोगियों के नाम पर रखे जाने की आशंका की भी जांच की गई।
यहां यह समझना जरूरी है कि कुर्की का अर्थ संपत्ति पर जांच एजेंसी की अस्थायी कानूनी कार्रवाई है। इससे संपत्ति के अवैध स्रोत का अंतिम न्यायिक फैसला अपने आप नहीं हो जाता।
07 | भारत से विदेश तक तलाश: इंटरपोल के रेड कॉर्नर नोटिस का रोल
सौरभ चंद्राकर की तलाश भारतीय एजेंसियां लंबे समय से कर रही थीं। उसके खिलाफ इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया था। इसका उद्देश्य सदस्य देशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच किसी वांछित व्यक्ति का पता लगाने और उसे हिरासत में लेने के लिए सहयोग स्थापित करना है।
इस मामले में पहले संयुक्त अरब अमीरात में भी उसकी हिरासत को लेकर घटनाक्रम सामने आया था। हालांकि प्रत्यर्पण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई थी।
बाद में भारतीय एजेंसियों को उसके ओमान में मौजूद होने की जानकारी मिली। इसके बाद सीबीआई और ईडी ने ओमान के अधिकारियों के साथ प्रत्यर्पण की प्रक्रिया शुरू की।
ओमान की रॉयल पुलिस ने इंटरपोल नोटिस के आधार पर उसे हिरासत में लिया। भारत की ओर से औपचारिक प्रत्यर्पण प्रस्ताव और जांच से जुड़े दस्तावेज भेजे गए। ओमान की सक्षम एजेंसियों से मंजूरी मिलने के बाद सीबीआई की विशेष टीम मस्कट पहुंची और उसे भारत लेकर आई।
इस पूरी कार्रवाई में भारत सरकार की एजेंसियों, इंटरपोल के नेशनल सेंट्रल ब्यूरो और ओमान के अधिकारियों के बीच समन्वय रहा।
08 | अब रायपुर में पूछताछ: जांच के सामने कौन से बड़े सवाल?
सौरभ चंद्राकर की भारत वापसी के बाद अब जांच का अगला महत्वपूर्ण पड़ाव रायपुर है। सीबीआई के अनुसार, वह दो मामलों में वांछित है, जिनमें आरोपपत्र दाखिल किए जा चुके हैं। इसके अलावा ईडी के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में भी उसके खिलाफ अभियोजन शिकायत दाखिल की गई है।
भारत लाए जाने के बाद मेडिकल परीक्षण और ट्रांजिट रिमांड की प्रक्रिया के बाद उसे रायपुर की विशेष सीबीआई अदालत में पेश किया जाना है।
अब जांच एजेंसियों के सामने कई महत्वपूर्ण सवाल हैं:
- महादेव ऑनलाइन बुक के पूरे नेटवर्क का संचालन किन लोगों के जरिए होता था?
- सट्टेबाजी से प्राप्त रकम किन-किन बैंक खातों में पहुंचती थी?
- विदेशों में मौजूद संपत्तियों का वास्तविक मालिक कौन है?
- हवाला के जरिए रकम विदेश भेजने में किन लोगों की भूमिका थी?
- कथित संरक्षण राशि किन अधिकारियों तक पहुंचाई गई?
- नेटवर्क के दूसरे प्रमुख संचालकों और सहयोगियों की भूमिका क्या थी?
इन सवालों के जवाब जांच की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
09 | रवि उप्पल से लेकर दूसरे सहयोगियों तक, नेटवर्क की अगली कड़ी
महादेव ऐप के मामले में सौरभ चंद्राकर अकेला प्रमुख नाम नहीं है। रवि उप्पल को भी इस नेटवर्क का प्रमुख प्रमोटर और सह-संचालक बताया गया है।
जांच एजेंसियों के अनुसार, दोनों ने मिलकर ऑनलाइन सट्टेबाजी के कारोबार का विस्तार किया था। नेटवर्क के वित्तीय संचालन, हवाला और दूसरे सहयोगियों की भूमिका को लेकर भी जांच जारी है।
इस मामले में कई पैनल संचालकों, कथित हवाला ऑपरेटरों और अन्य लोगों के नाम सामने आ चुके हैं। अब सौरभ से पूछताछ के दौरान इन लोगों के साथ उसके संबंधों और नेटवर्क में उनकी भूमिका को लेकर नए तथ्य सामने आ सकते हैं।
हालांकि किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच और अदालत की कार्यवाही के बाद ही निकाला जा सकता है।
10 | महादेव केस की टाइमलाइन: कब क्या हुआ?
- 2018 के आसपास महादेव ऑनलाइन बुक नेटवर्क की शुरुआत से जुड़ी रिपोर्टें सामने आईं। सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल का नाम प्रमुख प्रमोटरों के रूप में सामने आया।
- 2019 के आसपास दोनों के दुबई जाने और वहां से नेटवर्क संचालित करने की बात मीडिया रिपोर्टों में सामने आई।
- फरवरी 2023 दुबई के रास अल खैमाह में सौरभ चंद्राकर की शादी हुई। ईडी ने आयोजन पर करीब 200 करोड़ रुपये नकद खर्च किए जाने का आरोप लगाया।
- सितंबर 2023 शादी के खर्च और हवाला लेनदेन से जुड़े ईडी के दावे राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आए।
- 2024 यूएई में सौरभ की हिरासत और भारत की प्रत्यर्पण कोशिशों से जुड़ा घटनाक्रम सामने आया।
- मार्च 2026 ईडी ने मामले में करीब 1700 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क कीं।
- 1 नवंबर 2026 ओमान से सौरभ चंद्राकर का प्रत्यर्पण हुआ। सीबीआई की विशेष टीम उसे भारत लेकर आई।
- 2 नवंबर 2026 रायपुर की विशेष सीबीआई अदालत में पेशी प्रस्तावित है।
THE BIG QUESTION | क्या सौरभ की वापसी से खुलेगा महादेव नेटवर्क का पूरा राज?
सौरभ चंद्राकर की भारत वापसी ने महादेव सट्टा मामले को फिर राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला दिया है। अब तक जांच एजेंसियों ने नेटवर्क के वित्तीय लेनदेन, कथित हवाला कारोबार, विदेशों में संपत्तियों और सरकारी संरक्षण के आरोपों पर कार्रवाई की है।
लेकिन इस मामले की पूरी तस्वीर सामने आना अभी बाकी है।
सौरभ से पूछताछ में यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि इस नेटवर्क का वास्तविक संचालन कैसे होता था, पैसे का अंतिम लाभार्थी कौन था और विदेशों में बनाई गई संपत्तियों के पीछे किन लोगों का पैसा लगा था।
दुर्ग की जूस दुकान से शुरू होकर दुबई की आलीशान जिंदगी तक पहुंची यह कहानी अब भारतीय जांच एजेंसियों और अदालत की प्रक्रिया के अगले चरण में है।
सौरभ चंद्राकर की वापसी महादेव सट्टा मामले का अंत नहीं, बल्कि जांच के एक नए अध्याय की शुरुआत है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या इस नेटवर्क के सिर्फ प्रमोटरों तक जांच पहुंचेगी या इसके पीछे मौजूद पूरे वित्तीय और संरक्षण तंत्र की परतें भी खुलेंगी?
